Wednesday, February 07, 2007

पोर्टेबल फायरफॉक्स-बढिया जुगा्ड

सबसे पहले तो मै श्रीश को धन्यवाद दूगां जिन्होने मेरी समस्या का समाधान कर दिया । जब गत रात चैट रुम मे श्रीश ने कहा "क्लीनिक में भी चैन नहीं नेट के बिना। :) " लेकिन सही माने मे यहाँ आन लाइन तो रहता हूँ लेकिन ब्लाग पढने की फ़ुर्सत नही मिलती , हाँ कुछ ब्लाग अवशय पेन ड्राइव पर डाल लेता हूँ और घर जा कर पढ लेता हूँ। श्रीश ने सुझाव दिया को पोर्टेबल फायरफॉक्स और ScrapBook का क्यों नही प्रयोग करते । कल सुबह मै तो पूरी तैयारी के साथ आया था । पोर्टेबल फायरफॉक्स और ScrapBook को डाऊनलोड किया और घर आकर इन्टर्नेट कनेक्शन कटवा देने के बावजूद पूरा मजा लिया। आप भी कर सकते हैं अगर आप की समस्या मेरी समस्या से मिलती जुलती है। फ़िर देर क्या, तैयारी शुरु करें:
1- पोर्टेबल फायरफॉक्स को यहाँ से डाऊनलोड करें और इन्सटाल करते समय इसकी लोकेशन removable disk या pen drive मे दें। नीचे देखें आकृति 1 और 2


2- इन्साटाल करने के बाद removable disk पर double click कर के खोलें। फ़ायरफ़ाक्स पोर्टेबल पर double click करे , फ़ायरफ़ाक्स इस्तेमाल करने के लिये पूरी तरह से तैयार्। देखें नीचे आकृति 3


3- अभी सवाल जिन साइटों को आप देख रहे है, उनको save कर के घर जाकर देखने का है। इसके लिये फ़ायर्फ़ाक्स के scarp book के add-ons को यहाँ से डाऊनलोड करके इन्सटाल करें। यह कुछ इस तरह दिखेगा। देखें नीचे आकृति 4


4- जितनी साइटों को देखना है उनको ctrl +T दबाकर खोलें और ScrapBook पर जाकर capture all tabs पर किलक करें, एक नये नाम से फ़ोल्डर बनाये ( जैसे मैने आज दिनांक 7-2-2007 के नाम से बनाया है। ), फ़ायरफ़ाक्स बन्द करें , घर जाये, पेन ड्राइव को दूसरे कम्पयूटर मे लगायें और मजे से इन्टर्नेट न होते हुये भी इन्टर्नेट का मजा लें।

4 comments:

सागर चन्द नाहर said...

वाह डॉक्टर साहब बढ़िया जुगाड़ ढूंढ लाये आप तो, चलिये इसी बहाणे एक और नया जुगाड़ी और मास्टर तो मिला हमें|
ऑफलाईन चिट्ठे मुबारक हो आपको :)

Raag said...

क्या सही जुगाड़ है।

Shrish said...

अजी डॉक्टर साब डायलअप के जमाने में हम ScrapBook के दीवाने थे। रात को १० मिनट की एक कॉल होती थी। तब मैं पढ़ने लायक सारी चीजें कॉपी कर रख लेता था और दिन में पढ़ा करता था। स्क्रैपबुक जितनी आप समझ रहे हैं उससे तगड़ी चीज है, इस पर एक क्लास लगाने का बहुत पहले से इरादा है।

DR PRABHAT TANDON said...

@Shrish
तो लगाओ भाई , जरा जल्दी लगाओ, अगले चिट्ठे की प्रतीक्षा रहेगी।